🌟 ट्रांसफॉर्मर किया होता है (What is Transformar )
ट्रांसफॉर्मर एक ऐसी स्थैतिक युक्ति (static device) है, जो जो विधुत ऊर्जा को एक सर्किट से दूसरे सर्किट में स्थानांतरित करता है और ट्रांसफॉर्मर इसके साथ साथ वोल्टेज को अपचयन (step-down) or उच्चायन (step -up) करता है l ट्रांसफॉर्मर केवल प्रत्यावर्ती धारा(AC) पर ही कार्य करता है दीष्ट धारा (DC) पर नहीं l


🌟 ट्रांसफॉर्मर का कार्य सिद्धांत ( Working Principal OF Transformar)
ट्रांसफॉर्मर , अन्योन्य प्रेरण (mutual inductance) के सिद्धान्त पर काम करता है इसका काम सिर्फ AC सर्किट में होता है सिद्धान्त के अनुसार, जब प्राइमरी वाईडिंग में ए सी सप्लाई दी जाती है तो इस वाइंडिंग के चारो ओर प्रत्यावर्ती सवभाव वाला चुंबकीय क्षेत्र उत्पन हो जाता है l इसी चुंबकीय क्षेत्र के कारण सेकेंड्री वाइंडिंग में वि. वा. ब. उत्पन्न हो जाता है जबकि दोनों वाइंडिंग के बीच किसी प्रकार का वेधुतिक संबंध नही होता है

🌟  ट्रांसफॉर्मर की संरचना (Constuction of Transformar)

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🌟 ट्रांसफॉर्मर के मुख्य भाग
वाइंडिंग , लेमिनेटिड कोर , कंटेनर , टर्मिनल 


1. वाइंडिंग _: ट्रांसफॉर्मर वाइंडिंग में दो प्रकार की होती है
1.1 प्राइमरी वाइंडिंग ( primary winding) _: जिस वाइंडिंग को ए. सी. विधुत स्त्रोत से संयोजित किया जाता है , वह प्राइमरी वाइंडिंग कहलाती है l इसका बोबिन के उपर कुंडली बनाकर टर्न देकर निर्माण किया जाता है इसमें टर्नो की संखिया, आवश्यक फलक्स घनत्व उत्पन्न करने की क्षमता के आधार पर की जाती है

1.2 सेकेंडरी वाइंडिंग ( Secondary winding ) _: जिस वाइंडिंग को लोड से कनेक्ट किया जाता है वह सेकेंडरी वाइंडिंग कहलाती है l इसके तार का आकार (size) वाइंडिंग में से निकलने वाला करेंट के आधार पर या वाइंडिंग के लोड पर निर्भर करता है l


2. लेमिनेटिड कोर (Laminated Core) _: लेमिनेटेड कोर सिलिकॉन स्टील की बनी होती है प्रत्येक पटलिट कोर आपस में इनसुलेटिड रहती है ट्रांसफार्मर वाइंडिंग को इन लेमिनेटेड कोर पर स्थपित किया जाता है और कोर को एक स्टील खोल में स्थपित कर दिया जाता है l
कोर के मुख्य कार्य निम्न है _
1. प्राइमरी वाइंडिंग द्वारा स्थपित चुंबकीय क्षेत्र की चुंबकीय बल रेखाओं का मार्ग पूर्ण रखना l
2. प्राइमरी वाइंडिंग द्वारा स्थपित चुंबकीय क्षेत्र की अधिक सेअधिक चुंबकीय बल रेखाओं को सेकेंडरी में से गुजरना l

3. कंजर्वेटर (Conservetar) _: इसे आमतौर पर ऑयल टैंक भी कहते हैं ये टैंक ट्रांसफॉर्मर के ऑयल को स्टोर करता है यह आधा तेल से भरा रहता है l जो तेल ट्रांसफॉर्मर को इनसुलेशन तथा ट्रांसफार्मर को ढंडा रखने के लिए उपयोग किया जाता है l 


4.  टर्मिनल ( Terminal) _: कुण्डली के सिरों पर विधुत सप्लाई को एक जगह से दूसरी जगह स्थानांतरित करने का काम टर्मिनलो का होता है l ट्रांसफॉर्मर के टर्मिनलो के द्वारा प्राइमरी वाइंडिंग पर विधुत सप्लाई दी जाती है और सेकेंडरी वाइंडिंग से विधुत प्राप्त की जाती है l

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🌟 ट्रांसफॉर्मर की कार्यप्रणाली (Working of Transformar)


जब ट्रांसफॉर्मर की प्राइमरी  वाइंडिंग को ए. सी. सर्किट से जोड़ा जाता है l तो प्रतियावर्ती विधुत धारा के प्रवाह से प्राइमरी वाइंडिंग के चारो ओर एक प्रतियावर्ती स्वभाव का चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न हो जाता हैं l सेकेंडरी वाइंडिंग के चालक, प्राइमरी वाइंडिंग द्वारा स्थापित चुंबकीय क्षेत्र की चुम्बकीय बल रेखाओं का छेदन करते है l और फेराडे के विधुत चुंबकीय प्रेरण सिद्धान्त के अनुरूप उनमें वि. वा. ब. उत्पन्न हो जाता है क्योंकि प्राइमरी वाइंडिंग द्वारा स्थापित चुंबकीय क्षेत्र प्रतियावर्ती स्वभाव का होता है इसलिए सेकेंडरी वाइंडिंग के चालक, बिना कोई गति किए ही चुम्बकीय बल रेखाओं का छेदन करते हैं इस प्रकार, प्राइमरी वाइंडिंग तथा सेकेंडरी वाइंडिंग में बिना किसी संयोजित अथवा स्पर्श के ही वेधुत ऊर्जा, प्राइमरी वाइंडिंग से सेकेंडरी वाइंडिंग में स्थानांतरित होती है यह क्रिया ट्रांसफॉर्मर क्रिया कहलाती हैं l