ट्रांसफॉर्मर के लाभ ( Advantages of Transformar) l ट्रांसफार्मर्स का वर्गीकरण (Classification of Transformar)
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ट्रांसफॉर्मर के लाभ ( Advantages of Transformar) l ट्रांसफार्मर्स का वर्गीकरण (Classification of Transformar)
🌟 ट्रांसफॉर्मर के लाभ ( Advantages of Transformar)
1. ट्रांसफॉर्मर में कोई मूविंग पार्ट्स नही होता है l जिससे इसकी विशेष देखभाल की जरूरत नही पड़ती है l
2. स्थैतिक प्रकार का उपकरण होने के कारण ट्रांसफॉर्मर की दक्षता 90% से 98% तक होती है l जबकि अन्य वेधूतिक मशीनों की दक्षता इससे काफी कम होती है l
3. यह अति उच्च वोल्टेज पर सामान्य रुप से कार्य कर सकता है जबकि अन्य वेधुतिक मशीन अति उच्च वोल्टेज (400)KV पर सामान्य रुप से कार्य नही कर पाती है l
4. ट्रांसफॉर्मर द्वारा वोल्टेज कम करने का काम बहुत कम समय में अत्यंत कम विधुत सकती खपत पर सरलता से संपन्न किया जा सकता है जबकि DC वोल्टेज घटाने के लिए प्रतिरोधक का प्रयोग किया जाता है जो प्रयाप्त मात्रा में विधुत की खपत करते हैं
5. ट्रांसफॉर्मर के उपयोग से विधुत सकती के पारेशन (transmission) एवं वितरण ( Distribution) की कुल लागत डी. सी. प्रणाली की विधुत सकती के पारेशन एवं वितरण की लागत काफी कम होती है l
6. विधुत सकती के पारेशन में होने वाले वोल्टेज लॉस (वोल्टेज drop) को ट्रांसफॉर्मर द्वारा सरलता से पूरा किया जा सकता है जबकि डी. सी. प्रणाली में इस कार्य के लिए बूस्टर (booster) मोटर जनित्र सैट प्रयोग करने पड़ते है जो ज्यादा खर्चीले होते हैं l
🌟 ट्रांसफॉर्मर का वर्गीकरण (क्लासिफिकेशन of Transformar)
ट्रांसफॉर्मर का वर्गीकरण विभिन्न आधारों पर किया जा सकता है
1. आउटपुट वोल्टेज के आधार पर ( On the Basis of Output Voltage)
आउटपुट वोल्टेज के आधार पर ट्रांसफॉर्मर दो प्रकार के होते हैं
1उच्चायक ट्रांसफॉर्मर (स्टेप अप ट्रांसफार्मर) 2. अपचायक ट्रांसफॉर्मर (स्टेप डाउन ट्रांसफॉर्मर)
1 उच्चायक ट्रांसफॉर्मर ( step up transformar) जो ट्रांसफॉर्मर इनपुट वोल्टेज को बढ़ाकर अधिक आउटपुट वोल्टेज प्रदान करता है वह स्टेप अप ट्रांसफार्मर कहलाता हैं l
2 अपचायक ट्रांसफॉर्मर ( Step down transformar) जो ट्रांसफॉर्मर इनपुट वोल्टेज को घटाकर, कम आउटपुट वोल्टेज प्रदान करता है वह अपचायक या स्टेप डाउन ट्रांसफॉर्मर कहलाता हैं l
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ट्रांसफॉर्मर के लाभ ( Advantages of Transformar) l ट्रांसफार्मर्स का वर्गीकरण (Classification of Transformar) |
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2. कोर की संरचना के आधार पर (On the Basis of Core Construction)
ट्रांसफॉर्मर में प्राइमरी वाइंडिंग द्वारा स्थापित चुम्बकीय क्षेत्र के चुम्बकीय परिपथ को पूर्ण तथा संगन रखने के लिए लोह कोर का प्रयोग आवश्यक होता है ये कोर E,l,U,L,J,C आदि आकार की होती है यदि लोह कोर ठोस हो , तो उनमें एड़ी एड़ी धारा क्षतितथा हिस्टेरसिस क्षति का मान काफी अधिक होता है l
कोर की संरचना के आधार पर ट्रांसफॉर्मर तीन प्रकार के होते हैं
1 शैल प्रकार का ट्रांसफॉर्मर
2 कोर प्रकार का ट्रांसफॉर्मर
3 बैरी प्रकार का ट्रांसफॉर्मर
3. फेजो की संख्या के आधार पर (On the Basis of Number of Phase)
फेज के आधार पर ट्रांसफॉर्मर दो प्रकार के होते हैं
1 सिंगल फैज ट्रांसफॉर्मर
2 थ्री फैज ट्रांसफॉर्मर
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4. आउटपुट क्षमता के आधार पर ( On the Basis of Output Capacity)
आउटपुट क्षमता के आधार पर ट्रांसफॉर्मर दो प्रकार के होते हैं
1 ऑटो ट्रांसफॉर्मर
2 इंस्ट्रूमेंट ट्रांसफॉर्मर
5. व्यापारिक आधार पर (ओन the Basis of Commercial)
1 पावर ट्रांसफॉर्मर
2 डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफॉर्मर
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