Editors Choice

3/recent/post-list

Search This Blog

Author Profile

मेरी फ़ोटो
Bhilwara , Rajasthan

ELECTRICAL TECNICIAN

Design by - Blogger Templates | Distributed by Free Blogger Templates

Facebook

https://www.facebook.com/profile.php?id=100091612033795&mibextid=ZbWKwL

Comments

6/recent/ticker-posts
ads banner

फ्यूज किया होता है (what is fuse) ,फ्यूज का कार्य


परिचय (Introduction of Fuse )-
विद्युत सर्किट की सुरक्षा के लिए जिस उपकरण का प्रयोग करते हैं, उसे फ्यूज कहते हैं|
फ्यूज सुरक्षा उपकरण है, जो सर्किट में अधिक करंट, या शार्ट सर्किट होने पर विद्युत धारा को सर्किट में बहने से रोकता है, अर्थात सर्किट को ओपन करता है|

 

फ्यूज किया होता है (what is fuse) ,फ्यूज का कार्य 


फ्यूज के संबंध में क्या आवश्यक है?
1. फ्यूज सदैव सर्किट के सीरीज में जुड़ा होना चाहिए|
2. फ्यूज को हमेशा 30 बार में लगाना चाहिए|
3. फ्यूज वायर की करंट रेटिंग सदैव लोड के अनुसार होना चाहिए|
4. भिन्न भिन्न प्रकार के फ्यूज का प्रयोग लोड की प्रकृति के आधार पर करना चाहिए|
5. मोटर की अवस्था में जिसे प्रारंभ में उच्च करंट तथा बाद में सामान्य करण की आवश्यकता होती है ऐसे स्थानों पर सदैव एचआरसी फ्यूज का प्रयोग करते हैं|
6. औद्योगिक जगहों पर सदैव कॉटेज फ्यूज का प्रयोग करते हैं|
7. इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में ग्लास फ्यूज का प्रयोग किया जाता है|
8. ऐसे सभी स्थान जहां पर विद्युत आपूर्ति हो रही होती है, चाहे वह घरेलू वायरिंग को दी जाने वाली विद्युत आपूर्ति हो, या किसी विद्युत मशीन को या इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को ऐसे सभी स्थानों पर हम देखते हैं कि विद्युत फ्यूज लगा होता है जो घरेलू वायरिंग, विद्युत मशीन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण इत्यादि को खराब होने से बचाता है|
9. फ्यूज की सही रेटिंग, या प्रकार ना होने की वजह से, भवनों में, या गोदामों में आग लग जाती हैं|
अतः हमें सदैव ऐसे सभी जगह जहां विद्युत की सप्लाई दी जाती हैं उसके पहले एक निर्धारित रेटिंग का फ्यूज अवश्य लगा देना चाहिए|


🌟 फ्यूज कैसे कार्य करता है?
      किसी विद्युत परिपथ में कोई फ्यूज नहीं लगा है, तथा इस परिपथ में धारा प्रवाहित हो रही है, यदि किसी कारण से या विद्युत उपकरण में खराबी हो जाने के कारण, शॉर्ट सर्किट हो जाता है, और उस धारा का प्रवाह प्रारंभ हो जाता है, हम जानते हैं की उच्च धारा प्रवाह के कारण, विद्युत केबल या चालक गर्म होने लगेंगे, गर्म होने का सबसे ज्यादा प्रभाव ऐसे स्थान पर पड़ेगा जहाँ का गलनांक दुसरे जगहों की अपेक्षा कम होगा, जिसके फलस्वरूप उसी स्थान पर चालक पिघलने लगेगा, तथा यह प्रक्रिया तब तक चलता रहेगा, जब तक की वाह सर्किट ओपन नहीं हो जाता है|
उपरोक्त विशेषता का प्रयोग करके सर्किट में हम पहले से ही एक कमजोर भाग अर्थात कम गलनांक वाले विद्युत चालक का प्रयोग करते हैं, जो सर्किट में खराबी के कारण,पहले ही पिघल जाता है जो फ्यूज वायर कहलाता है  इसका गलनांक सर्किट में लगे अन्य चालकों की अपेक्षा कम होता है,
अतः फ्यूज वायर के लिए हम ऐसे चालक का प्रयोग करेंगे जिस का गलनांक कम हो| इसके लिए हम चांदी कॉपर, एलुमिनियम, इत्यादि का प्रयोग कर सकते हैं, परंतु इनका प्रयोग न करके हम लेट तथा टिन का एलॉय प्रयोग करते हैं,
फ्यूज बार में प्रयोग किए जाने वाले लीड तथा टिन की प्रतिशतता 63% तथा 37% होती है

🌟   फ्यूज निम्न प्रकार के होते हैं-
1. किटकैट फ्यूज या रीवायरेबल फ्यूज (Re-wirable Fuse or Kit-Kat Fuses)
2. कार्टरेज फ्यूज (Cartridge Fuse)
3. एचआरसी फ्यूज (HRC Fuse-High Rupturing Capacity Fuse)
4. ग्लास फ्यूज (Glass Fuse)


एक फ्यूज में निम्न भाग होते हैं
फ्यूज करियर (fuse carrier) फ्यूज किया होता है
फ्यूज बेस (Fuse Base)
फ्यूज वायर (Fuse Wire)
फ्यूज बेस कांटेक्ट (Fuse Carrier Contact)
फ्यूज कैरियर कांटेक्ट (Fuse Base Contact)


फ्यूज करियर :-
     फ्यूज वायर को फ्यूज कैरियर में फ्यूज कैरियर कांटेक्ट के द्वारा कसा जाता है|


फ्यूज बेस :-
     फ्यूज बेस एक स्थिर भाग होता है जिसे हम बोर्ड पर करते हैं जिसमें विद्युत सप्लाई का एक इनपुट तथा आउटपुट तार जुड़ा होता है |

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ