ओम का नियम (Ohm's Law ) परिभाषा, सूत्र l Kirchhoffs का नियम
ओम का नियम
जर्मन वैज्ञानिक जी. एस. ओम ने 1826 में डी. सी. परिपथों में विद्युत धारा (I),विभवानतर (V) , तथा प्रतिरोध (R ) के संबंध में एक नियम स्थापित किया था जो ओम के नियम कहलाता हैं l
यदि किसी चालक की भौतिक अवस्थाएं अपरिवर्तित रहे तो उसके सिरो का विभवानतर चालक में बहने वाली धारा के समानुपाती होता है
भौतिक अवस्थाएं _ लंबाई, दाब, ताप
(किसी भी चालक में प्रवाहित धारा एवं उसके सिरो के बीच विभवानतर में संबंध को ओम का नियम कहते हैं)
ओम का नियम DC (डी. सी) सप्लाई पर लागू होता है
V=R × I
R= V/I I = V/R
किरचॉप का नियम ( Kirchhoffs Laws)
जटिल प्रकार के डी सी परिपथों के लिए रूसी वैज्ञानिक किरचॉफ ने दो नियमो का प्रतिपादन किया था
1. विधुत धारा नियम
2. वॉल्टेज नियम
1. विधुत धारा नियम ( Electric Current Law)
इस नियम के अनुसार , ; किसी बंद डी सी परिपथ में चालको के संगम या नोड पर विद्युत धाराओं का बिजगणितीय योग शून्य होता है l
दूसरे शब्दों में किसी विधुत परिपथ में किसी भी संधि पर मिलने वाली समस्त विधुत धाराओं का बीज गणितीय योग के शून्य होता है
£I = 0
संधि _ जहा पर दो या दो से अधिक धाराएं एक दूसरे से मिलती है उसे संधि कहते हैं l
2. वोल्टेज नियम (Voltage Law)
Es नियम के अनुसार, किसी बंद डी सी परिपथ के किसी लूप अर्थात मेश में आरोपित विधुत वाहक बलो का बिजगणितीय योग उस लूप या मेश की प्रत्येक शाखा में हुए वॉल्टेज _ डॉपो के बिजगणितीय योग के तुल्य होता है
दूसरे शब्दों में किसी विधुत परिपथ के किसी बंद परिपथ/जाल के विभिन्न भागों मे प्रवाहित होने वाली विधुत धाराओं एवं संगत प्रतिरोधो के गुनफलों का बीज गणितीय योग उस जाल मे उपस्थित कुल विधुत वाहक बलो के बीज गणितीय योग के बराबर होता है l
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